Shelendra shukla "haldauna"

थोड़ा और निखर आता!!!

में थोड़ा और निखर आता
गर मुश्किलें और बढ़ जाती !
में कुछ और ही बन जाता
जो तू वक्त से मिल जाती !
फिकर में अब नहीं रहता
चूंकि मेरे आसपास तू रहती !
जब भी में हूं फिसलता
तू आकर हाथ थाम लेती !
जब हिम्मत हार मैं जाता
तू जवाब बन कर आ जाती !
आंखे बंद जब में कर लेता
तू सपनों में नजर आती !
किस्सा खतम जहां होता
कहानी नई शुरु तू करती !
में थोड़ा और निखर आता
गर मुश्किलें और बढ़ जाती !

शैलेन्द्र शुक्ला “हलदौना”

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this:
close-alt close collapse comment ellipsis expand gallery heart lock menu next pinned previous reply search share star