Shelendra shukla "haldauna"

आम का पिता 200 साल पुराने इस आम के पेड़ का है अपना एक इतिहास

इसकी उम्र करीब 200 साल बताई जाती है. इसी पेड़ पर पहला दशहरी आम आया था. एतिहासिक दशहरी के पेड़ को लगाने का श्रेय नवाब मोहम्‍मद अंसार अली को जाता है. उनके परिवार के वशंज इस पेड़ के मालिक हैं. आज भी इस पेड़ पर आने वाले आमों को सबसे पहले नवाब अंसार अली के परिवार को भेजा जाता है.
आम का वो पेड़ जो पिछले दो सदियों से अपने आमों से लोगों की जुबान में मिठास घोल रहा है. भारत में कई हजार तरह के आम अलग-अलग राज्‍यों की शान बने हुए हैं. आम की इन्‍हीं कुछ खास वैरायटीज में एक है उत्‍तर प्रदेश का दशहरी आम. ये आम इतना मशहूर है कि अब पाकिस्‍तान को भी निर्यात किया जाने लगा है. इसी आम का एक पेड़ है जिसे ‘फादर ऑफ मैंगो ट्री’ कहा जाता है. जानिए कहां पर है ये पेड़ और क्‍यों इसे कहते हैं फादर ऑफ मैंगो ट्री.

उत्‍तर प्रदेश में है ये एतिहासिक पेड़
दशहरी आम के उत्‍पादन में नंबर वन उत्‍तर प्रदेश में ये फादर ऑफ मैंगो ट्री है. राज्‍य में हर साल करीब 20 लाख टन दशहरी आम पैदा होता है. दशहरी आम का पहला पेड़ लखनऊ के पास काकोरी स्‍टेशन से सटे दशहरी गांव में लगाया गया था. इसी गांव के नाम पर इसका नाम दशहरी आम पड़ा. वह पेड़ आज भी मौजूद है, जिस पर पहला दशहरी आम आया था.

इसकी उम्र करीब 200 साल बताई जाती है. इसी पेड़ पर पहला दशहरी आम आया था. एतिहासिक दशहरी के पेड़ को लगाने का श्रेय नवाब मोहम्‍मद अंसार अली को जाता है. उनके परिवार के वशंज इस पेड़ के मालिक हैं. आज भी इस पेड़ पर आने वाले आमों को सबसे पहले नवाब अंसार अली के परिवार को भेजा जाता है.

इस पेड़ के आम बड़े मशहूर
दशहरी गांव अब मलिहाबाद में आता है और यह जगह अब दशहरी आम का उत्‍पादन करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है. मलिहाबाद के बुजुर्गों की मानें तो मिर्जा गालिब तक दशहरी आम के शौकीन थे. गांव के एक बुजुर्ग के मुताबिक जिस समय क्षेत्र को अवध के तौर पर जाना जाता था तो मिर्जा गालिब जब कभी भी कोलकाता से दिल्‍ली आते तो इस आम का स्‍वाद चखना नहीं भूलते थे.

दशहरी के अलावा वो इस क्षेत्र में मशहूर दूसरे प्रकार के आमों का भी लुत्‍फ भी उठाते थे. कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि जब अवध पर नवाब असफदुल्‍ला का राज था तो इस पेड़ को कब्‍जे में ले लिया गया था. उस समय सरकार नहीं चाहती थी कि आम लोग इस पेड़ पर आए आम को खाएं.

मलिहाबाद, दशहरी का स्‍वर्ग
मलिहाबाद, दशहरी आमों का स्‍वर्ग है. उत्‍तर प्रदेश में 14 बेल्‍ट हैं जहां पर आम की खेती होती है मगर मलिहाबाद सबसे खास है. मलिहाबाद में 30,000 हेक्‍टेयर के क्षेत्र में बस आम की खेती के लिए है. शासद इस वजह से ही उत्‍तर प्रदेश भारत में आमों के उत्‍पादन के मामले में दूसरे नंबर पर है. पहला नंबर अभी तक आंध्र प्रदेश का है.

दशहरी आम की खेती अब आंध्र प्रदेश में भी की जाने लगी है. पाकिस्‍तान, नेपाल, मलेशिया, फिलीपींस, हांगकांग, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया तक दशहरी आमों को भेजा जाता है. दशहरी आम जून में आता है और जुलाई के पहले हफ्ते तक रहता है. कहा जाता है कि बहुत ज्‍यादा गर्मी दशहरी आमों के लिए बेस्‍ट होती है और यह मौसम आम को बहुत मीठा बना देता है.
शैलेन्द्र शुक्ला “हल्दौना”

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